Friday, July 21, 2006

uudho karman ki gati nyari --surdas

sometimes soor also gets philosophical :)

ऊधो, कर्मन की गति न्यारी।।
सब नदियां जल भरि-भरि रहियां
सागर केहि बिध खारी।।
उज्ज्वल पंख दिये बगुला को,
कोयल केहि गुन कारी।
सुन्दर नयन मृगा को दीन्हे,
बन-बन फिरत उजारी ।।
मूरख मूरख राजे कीन्हे,
पंडित फिरत भिखारी।
सूर श्याम मिलने की आशा,
छिन-छिन बीतत भारी ।।

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